Kabeer ji ke bichar
नमस्कार दोस्तों आपको इस पॉट में संत कबीर जी के कुछ बिचार लिखने की कोसिसि करते है जो उन्होंने guru की महिमा को इस पोस्ट Kabeer Ji ke bichar के बारे में चर्चा करेंगे तो चलिए सुरु करते है।
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| Kabeer Sahb Ji |
दोतो आप जानते है की संत कबीर जी एक पूर्ण संत थे और उन्होंने समाज सुंदर के उत्थान के बहुत प्रमाण दिए साहब कबीर जी के बारे ने जितना कहे उतना कम है उन्होंने गुरु के बारे में कहा है।
- sant kabee ji ne kaha(संत कबीर जी ने कहा )
संत कबीर जी ने खा है गुरु की महिमा का बखान किया है जिसने कबीर जी ने गुरु के बारे में कहा गुरु गोबिंद दोऊ खड़े काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपनो ,जिन गोबिंद दियो लखाय।
कबीर जी कहते है की जब ऐसे गुरु की प्रप्ति तभी आत्मा का कल्याण होगा। यह आत्मा ,रूह ,SOUL एक ही है इसमें साहब जी कहते है की gurudev आपका में बहुत बलिहारी हु जिनके माध्यम से मुझे गोबिंद (GOD )की पहचान और मुझे जना दिया ऐसे गुरु को सत सत नमन करता हू।
- Jeev aatma ka jhamela (जीव आत्मा का झमेला )
संत महात्मा कहते है की यह सुरत यानि जीवात्मा जो इस संसार में भोगो में भटक गई है इसको अपने सच्चे घर का मालून नहीं है ये असली घर से बिछुड़ गई है और संसार के झमेले में पड़ गई है जिसको अपने सच्चे घर का पता नहीं है। घर का पता तो तभी लगेंगे जब कोई पंहुचा हुआ संत मिलेगा तभी होने अपने सच्चे घर का पता चलेगा।
- Sant mahatma kahte hei (संत महात्मा कहते है )
की जब से सुरत परमात्मा से अलग हुई है बापस अपने सच्चे घर नहीं लोटी है वह यहाँ जड़ माया में फसकर कर्मो के चक्क्रर में पद गई है। बो जन्मती है मरती है अपना सरीर का खोल बदलती रहती है जीव आत्मा चेतन है शरीर जड़ है और चौरासी लाख योनियों में भटकती रहती है। नारको में पिटती है। उसका कोई मदतगार नहीं होता है जब चौरासी के चककर समाप्त कर पुनः मनुष्य शरीर में आती है फिर वह संसारी बासनायो में पड़ जा ती है और इस प्रकार से संत महात्मा कहते है जीव आत्माओं का खेल चल रहा है। दोस्तों अपने हमारी पोस्ट में Kabeer Ji ke bichar के बिचार को पड़ा और कबीर जी की अनंत बिचार है जिनको में अपनी अगली पोस्टो ने बतलाने की कोसिस करुगा दोस्तों यदि आपको sant mhatmayo के बिचार अच्छे लगे हो तो आप कुछ सुझाव हमें कमेंट में कर सकते है।




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